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Daily Sujas Quiz – 27 Oct 2026

RCA TeamOctober 28, 2026 · 8 min read
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Daily Sujas Quiz-249 : 27 October 2026
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Daily Sujas Quiz




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अटल प्रगति पथ:

  • अटल प्रगति पथ योजना↗ का मक़सद गांवों और कस्बों को मज़बूत सड़क नेटवर्क से जोड़कर विकास को अंतिम छोर तक पहुंचाना है।
  • राज्य में अब तक 1,760 गांवों और 21 बसावटों को डामर सड़कों से जोड़ा गया है।
  • 5,000 से अधिक आबादी वाले गांवों में 765 अटल प्रगति पथ बनाने के लिए 1,686 करोड़ रुपये की मंज़ूरी जारी हुई है। इनमें से 335 बन चुके हैं और बाकी कार्य 31 जनवरी 2027 तक पूरे करने का लक्ष्य है। 
  • सुगम पथ और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीएमआईएस) के ज़रिए परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी हो रही है।

नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की 15वीं बैठक

  • नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण नर्मदा जल (सरदार सरोवर परियोजना) के बंटवारे से जुड़ा निकाय है। इसकी समीक्षा समिति की 15वीं बैठक केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में वीसी के माध्यम से हुई।
  • बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, मध्यप्रदेश के डॉ. मोहन यादव और गुजरात के भूपेंद्र पटेल जुड़े।
  • 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच समझौता हुआ था। 
  • इस नए समझौते के तहत मुख्य लाभार्थी राज्य गुजरात की लागत हिस्सेदारी को बढ़ाकर 75% कर दिया गया है, एवं मध्य प्रदेश के ऊपर पड़ने वाले पुनर्वास और विस्थापन संबंधी खर्च के बोझ को 31.98% से घटाकर 16.17% कर दिया गया है। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी को 7.76% एवं राजस्थान की हिस्सेदारी को 0.25% से बढ़ाकर 1.07% तय किया गया है।
  • राजस्थान 1979 के नर्मदा जल विवाद अधिकरण के तहत मानसून अवधि में मिलने वाले अधिशेष (ज़रूरत से ज़्यादा) जल के उपयोग के लिए काम कर रहा है। 
  • नर्मदा नहर परियोजना के तहत जालौर और बाड़मेर के पूरे कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई पद्धति अनिवार्य की गई है। 
  • इस तकनीक से 2.46 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र में 40 प्रतिशत सिंचाई सघनता का लक्ष्य प्राप्त किया गया है।

चूरू: रंगीन हवेलियों की धरती

  • चूरू राजस्थान में थार मरुस्थल के रेतीले टीलों के बीच बसा है। यह अपनी कलात्मक हवेलियों, मंदिरों और हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है।
  • ताल छापर अभयारण्य:
    • यह सुजानगढ़ तहसील में है ।
    • यह काले हिरण (ब्लैक बक) और कई पक्षियों का सुरक्षित घर है।
    • इसका नाम छापर गांव पर पड़ा है।
    • यहां डेमोइसेल क्रेन (कुरजां), ब्लैक आइबिस और ईस्टर्न इंपीरियल ईगल जैसे पक्षी मिलते हैं।
    • यहां मरुस्थलीय लोमड़ी और मरुस्थलीय बिल्ली भी दिखती हैं।
  • सेठानी का जोहड़ा:
    • यह चूरू से करीब 5 किमी पश्चिम में रतनगढ़ रोड पर है।
    • इसे 1899 में भगवान दास बागला की विधवा ने अकाल राहत परियोजनाओं के तहत बनवाया था।
  • गज केसरी हवेली:
    • यह चूरू ज़िले के रतननगर में है और शेखावाटी क्षेत्र का प्रवेश द्वार मानी जाती है।
    • यह 1899 में बनी थी और इसमें लगभग 1500 भित्ति चित्र (फ्रेस्को) हैं।
    • इसमें राजपूत, शेखावाटी, फ़ारसी और यूरोपीय नियो-क्लासिकल शैलियों का मेल है।

स्रोत: सुजस बुलेटिन, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, राजस्थान सरकार (27 अक्टूबर 2026)

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