राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024 (Rajasthan Export Promotion Policy-2024)

राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन निति-2024

राज्य सरकार द्वारा निर्यात पोर्टफोलियो का विस्तार एवं विविधीकरण करते हुए राजस्थान के निर्यात को बढ़ाने के उद्देश्य से ‘राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024’ लागु की गयी है। इसके तहत विभिन्न प्रोत्साहन जैसे मार्केटिंग सहायता, गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण पर सब्सिडी शामिल है जिससे अगले 5 वर्षों में निर्यात को 1.5 लाख करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। 

  • अधिसूचना – 08 दिसंबर 2024
  • यह नीति अधिसूचना की तिथि से 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। 
  • नीति का कार्यान्वयन : उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ,(राजस्थान) द्वारा किया जायेगा।  

यह निति राजस्थान के निम्नलिखित निर्यातकों पर लागु होगी :-

  • निर्माता निर्यातक 
  • सेवा निर्यातक 
  • व्यापारी निर्यातक 

(a) वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य का निर्यात 83,704.24 करोड़ रुपए रहा, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2029 तक 1.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचना। 
(b) राज्य के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र (Export Ecosystem) को सुदृढ़ करना, जिसमे शामिल है –

  • लॉजिस्टिक 
  • निर्यात अवसंरचना 
  • एयर कार्गो सेवाएं आदि। 

(c) मूल्य वर्धन (Value Addition) के माध्यम से उत्पाद विविधीकरण को बढ़ावा देना तथा नए निर्यात बाजारों की खोज करना। 
(d) विश्व स्तरीय निर्यात अवसंरचना उपलब्ध कराकर राजस्थान के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना। 
(e) वर्ष 2029 तक निर्यात क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल को दोगुना करना। 
(f) तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहित करने हेतु अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना। 
(g) उत्पाद गुणवत्ता एवं मानकों को उन्नत करने हेतु पहल करना तथा निर्यात उत्पादों के प्रमाणीकरण को सुविधाजनक बनाना। 

उपरोक्त उद्देश्य को प्राप्त करने हेतु राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन निति में निम्न रणनीतियां अपनाने का प्रावधान किया गया है 
(a) निर्यात के लिए “PUSH” फ्रेमवर्क :- यह फ्रेमवर्क निम्न बिंदुओं पर केंद्रित होगा :

  • P : Promotes – Value addition in Exports 
  • U : Upgrades – Infrastructure Institutional Framework 
  • S : Streamline – Process for Ease of Doing Export 
  • H : Harness – Digital Technology 

PUSH फ्रेमवर्क राजस्थान को एक प्रमुख निर्यात केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

(b) मूल क्षमताओं का उपयोग (Leverage Core Competencies)

  • वस्त्र, हस्तशिल्प, रत्न एवं आभूषण तथा आयामी पत्थर जैसे क्षेत्रों में राज्य की स्थापित क्षमताओं की पहचान एवं उपयोग। 
  • पारम्परिक ज्ञान का संरक्षण करते हुए डिज़ाइन एवं उत्पाद विकास में नवाचार को प्रोत्साहन। 

(c) विविधीकरण को बढ़ावा (Promote Diversification)
(d) वैश्विक पर्तिस्पर्धा क्षमता बढ़ाना (Enhance Global Competitiveness)
(e) निर्यातकों को सशक्त बनाना (Empower Exporters)
(f) सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण (Create a Supportive Ecosystem)
(g) सतत एवं नैतिक प्रथाओं को बढ़ावा (Promote Sustainable & Ethical Practices)
(h) डेटा आधारित दृष्टिकोण (Data Driven Approach)

राज्य में निर्यात प्रोत्साहन के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निम्नलिखित संस्थागत व्यवस्थाएँ की गयी है :

Institutional Framework

(a) राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन समन्वय परिषद (REPCC)

  • यह राज्य स्तर की सर्वोच्च संस्था है जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करते है। यह परिषद सरकार को निर्यात नीति निर्माण, समन्वय एवं कार्यान्वयन संबंधी विषयों पर परामर्श प्रदान करती है। 

(b) जिला निर्यात प्रोत्साहन समिति (DEPC)

  • अध्यक्ष – जिला कलेक्टर। यह समिति REPCC, भारत सरकार, ODOP एवं निर्यात प्रकोष्ठ के निर्देशों का क्रियान्वयन करती है। 
  • जिला स्तरीय उद्योग एवं वाणिज्य समीक्षा समिति (DLRC) ही DEPC के रूप में कार्य करती है। 

 (c) राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन परिषद (REPC)

  • राज्य सरकार, निर्यातक एवं उद्योगों की सहभागिता से REPC की स्थापना की गयी है। यह 5 प्रभागों के माध्यम से कार्य करेगी। 
  • इसकी सदस्यता राज्य की निर्यात इकाइयों हेतु वार्षिक शुल्क के आधार पर होगी। 

(e) MSME निवेश एवं सुविधा केंद्र (MIFCs)

  • इनकी स्थापना जिला स्तर पर की गयी है। 

(f) राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU)

  • इसकी स्थपना राज्य स्तर पर की जाएगी, जो उद्यमियों, निर्यातकों, कारीगरों एवं बुनकरों को हैंडहोल्डिंग सहायता प्रदान करेगी। 
राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024 (Rajasthan Export Promotion Policy-2024)

इस निति में 8 विशेष क्षेत्र निर्धारित किये गए है जिन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा –

  1. इंजीनियरिंग वस्तुएं 
  2. रत्न एवं आभूषण 
  3. आयामी पत्थर एवं खनिज 
  4. वस्त्र एवं परिधान 
  5. हस्तशिल्प 
  6. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण 
  7. पर्यटन एवं आतिथ्य 
  8. स्वास्थ्य एवं वेलनेस 
  • क्षमता निर्माण के लिए ‘मुख्यमंत्री निर्यात वृद्धि अभियान’ चलाया जायेगा एवं IIFT/DGFT के सहयोग से प्रशिक्षण दिया जायेगा साथ ही FSSAI, ISO, CSIR जैसे संस्थानों से गुणवत्ता एवं प्रमाणन प्रशिक्षण दिया जायेगा। 
  • अंतराष्ट्रीय ट्रेड फेयर/प्रदर्शनी में भाग लेने पर 75% तक खर्च प्रतिपूर्ति (अधिकतम 3 लाख रुपए, 2 साल में एक बार)
  • RIPS के तहत निर्यात प्रोत्साहन हेतु फ्रेट सब्सिडी दी जाएगी, जिसके अंतर्गत राज्य के ICDs/एयर कार्गो काम्प्लेक्स के माध्यम से निर्यात पर कुल फ्रेट खर्च का 25% (अधिकतम 25 लाख रुपए/इकाई/वर्ष) प्रतिपूर्ति दी जाएगी, साथ ही पहली बार निर्यात करने वाली MSME इकाई को भी यह सब्सिडी दी जाएगी। 
  • E-Commerce Export को प्रोत्साहन के लिए कुल खर्च का 75% प्रतिपूर्ति (अधिकतम 2 लाख रुपए) राशि दी जाएगी। 
  • एक निर्यात विकास कोष का गठन किया जायेगा। 
  • निर्यात प्रदर्शन, संभावना एवं निर्यात को प्रभावित करने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कारकों के मूल्यांकन के लिए EPI (Export Preparedness Index, निर्यात तैयारी सूचकांक) जारी किया जायेगा जिसके चार प्रमुख स्तम्भ होंगे – नीति, व्यावसायिक वातावरण, निर्यात परितंत्र, निर्यात प्रदर्शन। 
  •  साथ ही कई श्रेणियों में राज्य सरकार द्वारा पुरस्कार दिए जायेंगे। 

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