
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के औषधीय उत्पाद “नागौरी अश्वगंधा” को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI Tag) दिया गया है। राज्य के लिए कृषि श्रेणी में यह पाली की सोजत मेहँदी के बाद दूसरा GI Tag है। इसी के साथ अब राजस्थान के कुल 23 उत्पादों को GI Tag दिया जा चुका है।
अश्वगंधा के बारे में मुख्य बातें :
- यह एक प्राचीन औषधीय पौधा है जिसका वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्निफ़ेरा है।
- इसकी जड़े लम्बी और मोटी होती है, इनमे औषधीय तत्व विशेष रूप से एल्कलॉइड अधिक मात्रा में पाया जाता है।
- यह शरीर को तनाव के अनुकूल करने एवं संतुलन बनाये रखने में मदद करती है इसलिए इसे ‘अडेप्टोजन’ कहा जाता है।
- यह एक खरीफ की फसल है, जिसकी खेती के लिए शुष्क एवं उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु एवं रेतीली दोमट/हल्की लाल मिट्टी अनुकूल होती है।
- राजस्थान में इसकी खेती मुख्यतः नागौर जिले में की जाती है। इसके अलावा बीकानेर, चूरू, बाड़मेर एवं जोधपुर में भी इसकी खेती की जाती है।
- नागौर की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी इसकी खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
GI Tag भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अंतर्गत कार्यरत
भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री (GI Registry)द्वारा दिया जाता है, इसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।
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